बच्चे का लिंग और जन्म का समय

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जैसा कि सभी जानते हैं कि; वैदिक ज्योतिष एक प्राचीन विज्ञान है; जो जन्म कुंडली (कुंडली) के माध्यम से जातक की विशेषता प्रदर्शित करता है; प्राचीन विज्ञान होने के नाते, इसमें कोई शक नहीं है कि; जन्म कुंडली बनाने के लिए की जाने वाली गणनाएं पूरी तरह से विज्ञान पर आधारित होती हैं; यह गणित बिल्कुल शुद्ध होता है; यह ग्रहों और लग्न (जन्म कुंडली के प्रारम्भ बिंदु को दर्शाने वाली गणना) की एक व्यवस्था होती है; जो कुंडली के प्रयोग से भविष्यवाणी में सटीकता लाती है।

जन्म के सही समय से, जातक की विंशोत्तरी दशा की गणना भी की जा सकती है; इसके बाद उनके जीवन में होने वाली घटनाओं का अनुमान लगाया जा सकता है, जैसे; लम्बा जीवन, शिक्षा, करियर, शादी और वो सभी घटनाएं जो जातक के जीवन में घटित हो सकती हैं; यह कितना रोचक है! है न? किसी व्यक्ति को बस निम्नलिखित जानकारी देने की ज़रूरत होती है; जन्मतिथि, जन्मस्थान और जन्म का सही समय; पहले दो विवरण ज्यादातर लोगों के लिए आसान और सरल होते हैं। लेकिन अंतिम सही नहीं हो सकता। ऐसा क्यों? आज भी, कई लोग अपने जन्म के सटीक समय को लेकर निश्चित नहीं होते; वो इस गुत्थी को सुलझाने में मदद पाने के लिए विशेषज्ञ ज्योतिषियों की सेवा लेते हैं; लेकिन इससे उस व्यक्ति को कितना संतोष होता है उसका कोई अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता! 

जन्म का गलत समय रिकॉर्ड करने का एक कारण यह भी माना जाता है कि; जातक के माता-पिता उसके जन्म के समय ख़ुशी मनाने में लगे रहते हैं और जन्म का सही समय रिकॉर्ड करना भूल जाते हैं; :)… मैं मज़ाक कर रहा हूँ……

लेकिन वास्तव में; बहुत सारी कोशिशों के बावजूद आज भी; किसी नवजात के जन्म का सही समय रिकॉर्ड करने में कई गलतियां आ जाती हैं; जैसे कुछ मिनटों का अंतर इस प्राचीन विज्ञान के उद्देश्य को बेकार कर सकता है।

हालाँकि; इसके कई कारण दिए जाते हैं; लेकिन सबसे ज़रूरी सवाल है कि क्या जन्म का समय सही किया जा सकता है? इसका जवाब है, हाँ।

निश्चित रूप से; लग्न, चंद्र राशि, नक्षत्र के पद (1 से 4); महादशा और अन्तर्दशा, जातक की वर्ग कुंडलियों की स्थिति की जांच करके जन्म का समय सही किया जा सकता है; और जातक के जीवन की सच्ची घटनाओं से इनका मिलान किया जा सकता है।

ऊपर दिया गया तरीका निश्चित रूप से सामान्य है, लेकिन यह अधूरा है! ऐसा क्यों? अगर यह सवाल उठता है कि; ऐसा क्यों है तो कृपया अपनी जन्म कुंडली में एक आसान काम करें; अपने जन्म के समय को 4-5 मिनट बढ़ा या घटा दें; अब; लग्न, चंद्र की स्थिति; और शेष ग्रहों की स्थिति को असली जन्म कुंडली के साथ सत्यापित करें; क्या उनकी स्थितियों में कोई बदलाव हुआ है? अगर नहीं, तो फिर समय की सटीकता पर इतना जोर क्यों दिया जाता है; और इसके हर मिनट को इतनी महत्ता क्यों दी जाती है; विशेष रूप से, जब यह माना जाता है कि; ज्योतिष एक प्राचीन विज्ञान है; और जन्म के समय में थोड़ा सा भी अंतर किसी इंसान के जीवन की दिशा बदल देता है।

लेकिन अगर ज्योतिष विज्ञान है तो; फिर क्या समय में होने वाले थोड़े से भी परिवर्तन को आपका भाग्य नहीं बदल देना चाहिए? हालाँकि; जन्म कुंडली में कोई ख़ास परिवर्तन नहीं होता; इसीलिए हमें लगता है कि; यह अभ्यास अधूरा है। इसलिए हम तारका में अपनी विशेषज्ञता को अलग तरीके से पेश करते हैं।

कैसे?

जब हम जन्म का समय सही करने की बात करते हैं तो; समय के उद्देश्य को स्पष्ट तरीके से ज्योतिषीय बोलचाल में समझा जाना चाहिए; और यह नवजात के लिंग को दर्शाने के लिए होता है।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि; ज्योतिषीय घटनाओं का; अनुमान लगाने की तकनीक की दूसरी सभी विशेषताएं दूसरे दर्ज़े पर आती हैं; जैसे लम्बा जीवन, स्वास्थ्य, शिक्षा, विवाह, संतान, आदि। 

दरअसल; यही उन सबसे महत्वपूर्ण कारणों में से एक है जो कहता है कि; ज्योतिष एक विज्ञान है; वास्तव में, जन्म के समय की महत्ता चिकित्सीय ज्योतिष के समानांतर चलती है जो जातक के लिंग के बारे में बताती है। साथ ही, यहीं पर जन्म का सही समय रिकॉर्ड करने में कुछ मिनट की गलती होने पर आपसे संबंधित भविष्यवाणी गलत हो सकती है। 

मान लीजिये कि प्रश्न करने वाली जातक महिला है; और उसकी जन्म कुंडली का समय पुरुष की कुंडली दर्शाता है; क्या शिक्षा, करियर या यहाँ तक कि शादी जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं का; उसके जन्म का समय सही किये बिना अनुमान लगाया जा सकता है? केवल किसी दैवीय शक्ति से; ही इसमें मदद मिल सकती है, वो भी उसके जन्म का समय सही करने के बाद।

इसलिए, प्राचीन समय के दौरान; जन्म का समय घटी (एक घंटे में 2½ घट) में चिन्हित किया जाता था; घटी की गणना के आधार पर, किसी विशेष समय पर जन्मे बच्चे के लिंग का पता लगाया जाता है; प्राचीन ऋषियों ने बताया है कि; किसी विशेष समय या ग्रहों की खगोलीय स्थिति में; लड़का या लड़की जन्म ले सकता है और दोनों जन्म नहीं ले सकते; नवजात का लिंग सटीक तरीके से दर्शाने के लिए; यह गणना की जाती थी; जब यह नहीं होता तो जन्म कुंडली का कोई अर्थ नहीं बनता।

आधुनिक समय में; जब जन्म का समय पश्चिमी रूप (घंटा:मिनट:सेकंड) में रिकॉर्ड और इस्तेमाल किया जाता है तो; ज्योतिषीय गणना का सही अर्थ खो जाता है; तारक में हम विशेषज्ञ जानकारी की इसी खाई को भरते हैं जहाँ; ज्योतिष जन्म कुंडलियां बनाने, गणना करने; अन्य ज्योतिषीय विवरणों का पता लगाने; और प्रयोगकर्ता को उसके जीवन के संबंध में सही जानकारी देने के लिए कृत्रिम बुद्धिमता और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करता है।

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