ज्योतिष में दसवां भाव और इसका करिश्मा

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एक ज्योतिषी कुंडली में दसवें भाव को सबसे शक्तिशाली और ताकतवर भाव के रूप में देखता है। वैदिक ज्योतिष में, लोग इसे विष्णु स्थान भी कहते हैं। लग्न की तरह दसवें भाव से संबंधित सभी ग्रह अपने स्वामी और महत्ता के अनुसार अच्छे परिणाम देते हैं। दसवां भाव कुंडली में सबसे पवित्र भाव होता है और यह उन कर्मों को दर्शाता है, जिनके लिए इस दुनिया में आपका जन्म हुआ है।

दसवें भाव की महत्ता:

वाणिज्यव्यापारस्वामी से सम्मानघोड़े की सवारीकुश्तीसरकार का/में काम
सेवाकृषिमहत्वाकांक्षापिताप्रसिद्धिगुप्त  खज़ाना
शिक्षकखुद पर भरोसा रखने वालापवित्र मंत्रों का जापउद्देश्य की दृढ़ताघुटनेदवा
प्रतिष्ठागोद लिया गया पुत्रदृढ़ निश्चयसही रास्ताविदेश यात्रातीर्थ यात्रा
आत्म-नियंत्रण, चुनाव में जीत
आज्ञापालन के लिए आदेश देनाविशेषज्ञ शिक्षण क्षमताआत्म-सम्मान के साथ अच्छा जीवनव्यापक धार्मिक योग्यता

ज्योतिष में दसवें भाव के कारक ग्रह हैं – बुध, वृहस्पति, सूर्य और शनि। बुध अकेले ही दसवें भाव का कारक है, और यह ज्यादातर व्यवसाय और वाणिज्य गतिविधियों के लिए होता है। वृहस्पति विकास, भाग्य और विस्तार का कारक है। सूर्य प्रतिष्ठा, शक्ति और पद का कारक है, जबकि शनि आजीविका और सेवा का कारक है।

दसवें भाव में राशियां

मेष, वृष और सिंह वो तीन प्रमुख राशियां हैं, जिन्हें दसवें भाव में लाभकारी और मजबूत माना जाता है। अगर दसवें भाव में कोई ग्रह नहीं होता तो दसवें भाव में मौजूद राशियों की विशेषताएं बहुत महत्वपूर्ण बन जाती हैं। 

अग्नि राशियां : इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल, स्टील के काम, सर्जन, सैनिक, नाई और अन्य प्रकार के पेशे देती हैं। 

पृथ्वी राशियां : अर्थव्यवस्था, सिविल सेवा और प्रबंधन सेवाओं को दर्शाती हैं। इनमें खाद्य, खनन, लकड़ी, कृषि और अन्य संबंधित रोजगार भी शामिल हैं।

वायु राशियां : दार्शनिक, लेखक, ज्योतिष, वकील, पायलट आदि जैसे पेशों की संभावनाएं प्रदान करती हैं।

जल राशियां : तरल स्थिति से संबंधित रोजगार की संभावना प्रदान करती हैं जैसे दूध, शिपिंग, लॉन्ड्री, मर्चेंट नेवी, फिशिंग, मरीन इंजीनियरिंग, आदि।

दसवें भाव में ग्रह

दसवें भाव में अनुकूल स्थिति में मौजूद ग्रह अपने स्वामी, कारक, दूसरों ग्रहों के साथ संबंध और पक्ष के अनुसार अच्छे परिणाम देते हैं। अगर दसवें भाव में कोई ग्रह मौजूद है तो यह उस भाव के परिणाम देगा, जिसका यह स्वामी है। दसवें भाव की गणना न केवल लग्न से, बल्कि आरूढ़ लग्न, सूर्य और चंद्र से भी की जाती है। जब दसवें भाव में कई ग्रह मौजूद होते हैं, जो अच्छे और बुरे दोनों होते हैं, तो यह व्यक्ति को एक गहरी स्थिति में डाल देता है, जो बहुत अप्रत्याशित होती है।

दसवें भाव के करिश्मे को ज्यादा अच्छे से समझने के लिए, व्यक्ति को विभिन्न भावों में दसवें भाव के स्वामी के परिणामों का भी अध्ययन करना चाहिए। व्यक्ति को दसवें भाव में विभिन्न भाव के स्वामियों पर भी नज़र डालनी चाहिए। कोई भी स्वामी जब दसवें भाव में मौजूद होता है, तो उसके भाव की ताकत कई गुना बढ़ जाती है। इतना ही नहीं, एक ज्योतिषी को अन्य भावों के स्वामियों के साथ 10वें भाव के स्वामी की अदला-बदली का भी विस्तृत विश्लेषण करना चाहिए।

कुल मिलाकर ज्योतिष में, दसवां भाव उन कर्मों को दर्शाता है, जिनके माध्यम से कोई व्यक्ति आजीविका कमा सकता है, और जिससे समाज में उसका रुतबा बढ़ता है। दसवें भाव की विशेषताओं को किसी आंतरिक आवेग की बाहरी अभिव्यक्ति माना जा सकता है। दसवें भाव को आकाश का मध्य बिंदु भी कहा जाता है, जहां सूर्य अपनी सबसे उच्चतम स्थिति पर होता है। यह राजसी संरक्षण, पेशे और वर्तमान अवतरण के कर्म को दर्शाता है।

स्वस्थ और खुशहाल जीवन पाने के लिए, व्यक्ति की जन्म-कुंडली और उसके घर का वास्तु दोनों अच्छा होना चाहिए और उनका तालमेल होना भी ज़रूरी है। क्या आप जानना चाहते हैं कि आपके लिए क्या अच्छा है तो तारका से पूछें।

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