ज्योतिष में आध्यात्मिकता का महत्व

ज्योतिष में आध्यात्मिकता का महत्व
ज्योतिष में आध्यात्मिकता का महत्व

ज्योतिष, संसार और उसके आगे की दुनिया का विज्ञान है जो किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थितियों का
प्रयोग करता है और यह पता लगाता है कि उस व्यक्ति को अपने जीवन में कैसे और कौन से अनुभव मिलेंगे और उस
व्यक्ति का भाग्य कैसा है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि किसी व्यक्ति के पिछले कर्मों का फल उसे इस
जीवन में कैसे मिलेगा। लोग अपने जीवन में जो भी फैसले करते हैं वो उनका कर्म निर्धारित करता है और इन कर्मों
का अगले जन्म पर भी प्रभाव पड़ता है। एक और क्षेत्र जो ज्योतिष, कर्म और पुनर्जन्म से जुड़ा है वो है आध्यात्मिकता। (ज्योतिष में आध्यात्मिकता का महत्व)

आध्यात्मिकता क्या है?
आध्यात्मिकता किसी आत्मा की निरंतर प्रक्रिया या सफर है जो किसी व्यक्ति के संपूर्ण जीवनकाल और यहाँ तक कि
मौत के बाद दूसरे जीवनकाल में भी जारी रहती है, जब तक कि आत्मा प्रकृति और परमेश्वर के साथ एक नहीं हो जाती। इस आध्यात्मिकता के माध्यम से ही कोई व्यक्ति अपने मन को शुद्ध कर सकता है।

कई लोग ज्योतिष को आध्यात्मिक विज्ञान के अंग के रूप में मानते हैं। हम यह स्पष्ट रूप से पता नहीं लगा सकते कि
आध्यात्मिकता ज्योतिष का अंग है या ज्योतिष आध्यात्मिकता का अंग है, लेकिन हम निश्चित रूप से यह कह सकते हैं
कि ये दोनों ही बेहद गहरे, सूक्ष्म स्तर पर एक दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं। जहाँ ज्योतिष हमारे जीवनकाल में पहले से
निर्धारित कुछ चीजों के बारे में बताता है, वहीं आध्यात्मिकता वास्तव में खुद को खोजने का सफर है।

जीवित प्राणियों के रूप में, सर्वोच्च शक्ति में मिलना हमारी आत्मा का मुख्य लक्ष्य है, जिसे ‘मोक्ष’ कहा जाता है।
लेकिन, वहां पहुंचना आसान नहीं है। मोक्ष पाने के लिए हमारी आत्मा कई जन्म-मृत्यु के चक्रों से गुजरती है। हमारी
ज्योतिषीय जन्म कुंडली एक रिपोर्ट कार्ड जैसी है जो हमें इस बारे में बताती है कि हमारी आत्मा ने अब तक कितनी
आध्यात्मिक प्रगति की है और अभी कितनी प्रगति बाकी है।

क्या आप एक आध्यात्मिक व्यक्ति हैं?
क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है कि क्यों कुछ लोगों का आध्यात्मिकता की ओर ज्यादा झुकाव होता है, वहीं कुछ
लोगों को इसमें रत्ती भर भी दिलचस्पी नहीं होती या वे अपने अस्तित्व के सचेत दायरे से बाहर के बारे में कुछ भी
नहीं सोचते? लोग आध्यात्मिकता में जिस प्रकार से विश्वास करते हैं और इसे समझते हैं उसमें अंतर क्यों है? क्या यह
बस उनकी सोच है या कुछ और? वैसे, यह सीधे आपकी जन्म कुंडली से जुड़ा है।

हमारी जन्म कुंडली में कुछ ‘योग’ होते हैं जिनकी वजह से व्यक्ति का आध्यात्मिकता की ओर झुकाव होता है। जहाँ
ज्यादातर ज्योतिष के जानकार आपको बताएँगे कि वृहस्पति और केतु ऐसे दो ग्रह हैं जो यह निर्धारित करते हैं कि
किसी इंसान का आध्यात्मिकता के प्रति कितना झुकाव होगा और ये सामान्य तौर पर इसे दर्शाते हैं। लेकिन, यह पूरी
तरह सच नहीं है। हाँ, आध्यात्मिकता में वृहस्पति या गुरु की भूमिका सर्वोपरि होती है और किसी आध्यात्मिक व्यक्ति
की कुंडली में पूरी तरह से इसका प्रभुत्व होता है। यह धर्म, आध्यात्मिकता और दर्शन का कारक है और पिछले जन्मों
में किये गए अच्छे कर्मों का निर्धारक है। लेकिन, किसी व्यक्ति के आध्यात्मिक झुकाव और मार्ग को देखते समय सभी
नौ ग्रहों पर विचार करने की ज़रूरत होती है।

जन्म कुंडली किसी व्यक्ति के आध्यात्मिक झुकाव का पता लगाने में कैसे मदद करती है?
ग्रहों के कुछ ऐसे संयोग और स्थितियां हैं जो आध्यात्मिकता का ‘योग’ बनाती हैं। 5वें, 8वें और 12वें भाव में ग्रहों की
स्थिति और दूसरे ग्रहों के साथ वृहस्पति और केतु की स्थिति और संयोग के साथ 5वें, 8वें और 12वें भाव के स्वामियों
की स्थिति और संयोग का अध्ययन किया जाता है।

अलग-अलग अंशों में, ‘संन्यासी योग’ एक अन्य ‘योग’ है जिसकी वजह से किसी व्यक्ति का झुकाव आध्यात्मिकता की
ओर होता है। अगर किसी एक भाव में चार या उससे ज्यादा ग्रह हैं तो कहा जाता है कि उस व्यक्ति की कुंडली में यह
योग बनता है और वो संन्यासी बन जाता है और दुनिया छोड़ देता है। इन ग्रहों की स्थिति मित्रतापूर्ण तरीके से एक-

दूसरे के पास होनी चाहिए और ये सूर्य के बहुत पास नहीं स्थित होने चाहिए। अगर कोई ग्रह सूर्य के बहुत करीब होता
है तो उस व्यक्ति को आध्यात्मिकता में बहुत रूचि होगी लेकिन वो संन्यासी बनने के लिए दुनिया का त्याग नहीं
करेगा।

किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य की मजबूत स्थिति दर्शाती है कि वो व्यक्ति आध्यात्मिकता और इसके अभ्यास में बहुत
अच्छा काम करेगा, और यह विशेष रूप से उन लोगों पर लागू होता है जिन्हें आत्म-अनुशासन की ज़रूरत है। जन्म
कुंडली में चन्द्रमा की मजबूत स्थिति व्यक्ति को धार्मिक बनाती है। जिन लोगों की कुंडली में शनि मजबूत होता है वो
निःस्वार्थ सेवा करते हैं और शनि की साढ़े साती के दौरान उन्हें कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है, जो ज्यादातर लोगों
के जीवन में साढ़े सात साल के लिए आती है। जिनकी कुंडली में शुक्र मजबूत होता है उनके अंदर परमेश्वर की सेवा
करने की इच्छा होती है और वो परमेश्वर के प्रति अपनी आस्था दिखाने के लिए नृत्य-संगीत का प्रयोग करते हैं। केतु
व्यक्ति को सांसारिक सुखों से अलग करके आध्यात्मिकता की ओर ले जा सकता है। शुक्र और केतु का संयोग भी
आध्यात्मिकता का मजबूत संकेतक है।

ज्योतिष और आध्यात्मिकता के बीच की कड़ी को इतने छोटे विवरण से नहीं समझा जा सकता। आध्यात्मिकता को
लेकर आपकी चाहे जो भी सोच हो, हमेशा यह याद रखें कि आपकी आत्मा अपने आध्यात्मिक मार्ग पर है।
अगर आप आध्यात्मिकता की ओर अपने सफर के बारे में जानना चाहते हैं तो आप मार्गदर्शन और अपनी राशि के
विस्तृत विश्लेषण के लिए तारक के ज्योतिष विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।

ज्योतिष को मार्गदर्शन की तरह देखा जाना चाहिए जो आपको कर्म चुनने में मदद करता है ना कि भाग्य के भरोसे बैठने को कहता है। 

ज्योतिष / ग्रह / रत्नों से जुड़ें अपने अनुभवों को हमसे साझा करें। यदि आप अपने लिए सही रत्न की तलाश कर रहे हैं तो ज्योतिषियों की उचित सलाह लें अथवा ताराका ऐप डाउनलोड करें और हमें आपका मार्गदर्शन करने का मौका दें।

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