जिज्ञासा से हुआ ज्योतिष का जन्म

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ज्योतिष का जन्म कैसे हुआ ?

कल क्‍या होगा? यह सवाल आदि काल से आजतक सारी दुनिया में मनुष्‍य की एक साश्‍‍‍‍वत जिज्ञासा रहा है। इस सवाल के पीछे छुपी है भविष्‍य को जानने की उत्‍सुकता। मानव मन की इस उत्‍सुकता ने ही दुनिया की विभिन्‍न सभ्‍यताओं-संस्‍कृतियों में उस विधा या विज्ञान को जन्‍म दिया, जिसे भारत में हम ज्‍योतिष के नाम से जानते हैं। वास्‍तव में ज्‍योतिष की जड़ें अतीत की अतल गहराइयों से जुड़ी हुई हैं।

भारत के अलावा मेसोपोटामिया ,सुमेरिया, असीरिया, माया और चीन जैसी प्राचीन सभ्‍यताओं में ज्‍योतिष का प्रचलन अलग-अलग अवधारणाओं और  मान्‍यताओं के साथ सैकड़ों नहीं, बल्कि हज़ारों साल पहले से होता आया है। ऐसे में यह जान लेना उपयोगी रहेगा कि आखिर इस विधा की शुरुआत कैसे हुई या यूं कहें कि यह विधा आखिर आई कहां से ? 

ऐसे हुई शुरुआत

दरअसल हज़ारों साल पहले जब इंसान  ने आकाश में दिखने वाले तारों, ग्रहों-नक्षत्रों पर गहराई से ग़ौर करना शुरू किया, तो इनकी स्थिति में उसे एक तारतम्य और एक सुनिश्चित पैटर्न सा दिखाई दिया। आदमी को समझ में आया कि आकाश में नज़र आने वाले यह पिंड बस यूं ही अपनी मर्ज़ी से इधर-उधर नहीं भटकते, बल्कि ये एक सुनिश्चित क्रम और गति के नियमों में बंधे हुए हैं।

इसके बाद आकाशीय पिंडों की इन स्थितियों का असर भी उसे अपने इर्द-गिर्द की दुनिया और अपने जीवन पर पड़ता हुआ सा नज़र आने लगा। धीरे-धीरे आदमी ने अपने इन आकलनों की गहराई में उतरना और उन्हें व्यवस्थित करना शुरू किया। बस यहीं से ज्योतिष शास्त्र की शुरुआत होती है और ज्योतिष का जन्म हुआ।

खाली समय की देन

प्राचीन काल में लोगों के पास बहुत सारा समय होता था, जबकि उन्हें भटकाने के साधन बहुत कम थे। इसलिए, वे हर दिन बड़े-बड़े अनुष्ठान करने, महाकाव्य लिखने, खाने से लेकर घर के सामान तक हर चीज शुरू से बनाने, लोगों के बारे में बहुत अधिक राय बनाने और उन चीजों के बारे में विचार करने जैसे कई दूसरे काम करते थे, जिनके बारे में शायद ही हम कभी सोचते हैं।

ब्रह्माण्ड में भविष्‍य की तलाश

भविष्‍य में अपने जीवन की दिशा का अंदाज़ा लगाने के लिए और उससे जुड़े महत्वपूर्ण सवालों के जवाब खोजने के लिए उन्होंने ब्रह्माण्ड की ओर देखा। उन्‍होंने पहले ही इस चीज पर ध्यान दिया था कि ग्रहों, सूर्य और अन्य तारों के चलने का अपना एक पैटर्न है इसलिए उन्होंने उसे रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया। हमारे ग्रह पर होने वाली विभिन्न प्राकृतिक घटनाओं के लिए खगोलीय पिंडों की गतिविधियों की तुलना करने की वजह से समय, ज्वार-भाटा और मौसमों को रिकॉर्ड करना शुरू हुआ।

इससे हमारे पूर्वजों को ‘प्रकृति की मनोदशा’ का अनुमान लगाने में सफलता मिली, जो अभी तक सबके लिए एक रहस्य थी। वे ज्यादा सटीकता के साथ सभी प्राकृतिक घटनाओं का अनुमान लगाने में समर्थ थे, जिसकी वजह से उन्हें मानव के अस्तित्व और उनके बसने की प्रक्रिया को जानने-समझने में मदद मिली। साथ ही फैसल बोने और काटने जैसी जीवन से जुड़ी चीजों को समय के अनुकूल समायोजित करने में भी मदद मिली।

बढ़ती गई निर्भरता

शुरुआती दौर में तो सीमित आबादी और संसाधनों की बहुतायत के चलते मनुष्‍य की जीवन से जुड़ी जरूरतें आसानी से पूरी हो जाती थींं । समाज इस समय समृद्ध था। आगे चलकर बढ़ती हुई आबादी के लिए ज्यादा भोजन की ज़रूरत थी, जिसे उगाने के लिए पानी चाहिए था। इस तरह बारिश होने के समय और मानसून में देरी का अनुमान लगाने की क्षमता लोगों की ज़रूरत बन गई। इस तरह फसल चक्र की नियमित रूपरेखा बनाने के लिए ज्योतिष जैसी विधा की ज़रूरत बढ़ती गई।

हालांकि आधुनिक मौसम विभाग की तरह उनसे भी कभी-कभी गलती हो जाती थी। इसके लिए देवताओं की नाराज़गी को जिम्‍मेदार ठहराने और बुरी आत्माओं को दोष दे कर दिलासा दिया जाता था। तो, यह ऐसे होता था ! 

होने लगा भाग्‍य का फैसला

ज्‍योतिष के अस्तित्‍व में आने के बाद अब मनुष्‍य के लिए खगोलीय पिंड वो देवता थे, जो विशाल पृथ्वी के भाग्य और यहां होने वाली हर एक चीज का फैसला करते थे और अगर ऐसा है, तो ये देवता इंसानों के भाग्य का फैसला भी क्यों नहीं कर सकते थे? प्राचीन लोग ब्रह्माण्ड का अध्ययन कर सकते थे और अगली बारिश का अनुमान लगा सकते थे, तो यह पता लगाने के लिए भी उसी ज्ञान का अध्ययन किया जा सकता था कि धनीराम को दूसरा बच्चा होगा या नहीं, या मनसुख के लिए काम के मामले में यात्रा करना सही होगा या नहीं, या इससे उसे शुभ फल मिलेगा या नहीं।

इस तरह संक्षेप में हम यह कर सकते हैं कि मनुष्‍य ने जब अपने दैनिक जीवन की जिज्ञासाओं के समाधान के लिए आकाश के ग्रह-नक्षत्रों की ओर देखना, विचार करना शुरू किया, तब  ज्योतिष का जन्म हुआ।

स्वस्थ और खुशहाल जीवन पाने के लिए, व्यक्ति की जन्म-कुंडली और उसके घर का वास्तु दोनों अच्छा होना चाहिए और उनका तालमेल होना भी ज़रूरी है। क्या आप जानना चाहते हैं कि आपके लिए क्या अच्छा है तो तारका से पूछें।

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